महिलाओं के लिए विशिष्‍ट योजनाएं

गैर कृषि विकास में महिलाओं को सहायता (एआरडब्‍ल्‍यूआईएनडी)

खासकर ग्रामीण महिलाओं द्वारा समूह आधार पर गैर-कृषि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां चलाने में समर्थन देने की दृष्टि से, गैर-कृषि विकास में ग्रामीण महिलाओं को सहायता देने की योजना शुरू की गई है. इस योजना दो घटक हैं जैसे;

  1. ऋण घटक
  2. विकास घटक

घटक (1) के तहत, महिला दलों को सहायता करने में ऐसी स्‍वैच्छिक एजेंसी जिसका पिछले 3 वर्षों से कार्य निष्‍पादन प्रमाणित हो, केंद्र/राज्‍य सरकार द्वारा स्‍थापित महिला विकास निगम, केवीआईसी/केवीआईबी अथवा केवीआईसी/केवीआईबी के अधीन कोई भी संस्‍था, इस प्रयोजन के लिए केंद्र/राज्‍य सरकार द्वारा स्‍थापित सहकारी सोसाइटियों, न्‍यासों और निगमों सहित कोई दूसरी पंजीकृत संस्‍था, गैर-कृषि क्षेत्र में कोई उत्‍पादक गतिविधि चलाने में ग्रामीण महिला दलों को जुटाने के लिए योजना बना सकती हैं और उनकी खुद की इकाइयां स्‍थापित करने में मदद करने और/अथवा यथा आवश्‍यक प्रशिक्षण सहित ऐसी दूसरी विपणन/वायदा सुविधाएं प्रदान करने के लिए जो अलग-अलग/समूह प्रतिष्‍ठानों की अर्थ-क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी हो, सहायता दे सकती हैं.

अलग-अलग व्‍यक्तियों को योजना के तहत ऋण सहायता, सामान्‍यत: 50000/- रु. प्रति उधारकर्ता से अधिक नहीं होनी चाहिए अथवा उदाहरण के तौर पर 20 ग्रामीण महिलाओं की समूह गतिविधि के लिए 10 लाख रु. से अधिक नहीं होनी चाहिए. लेकिन वास्‍तविक ऋण राशि, आवश्‍यकता आधारित होनी चाहिए और उसे प्रायोजक एजेंसी द्वारा तय करना होगा अथवा गतिविधि के स्‍वरूप/स्‍थापित की जानेवाली इकाई के आधार पर उधारकर्ताओं/वित्‍तपोषक बैंक के साथ परामर्श करने के बाद तय करना होगा.

पात्र गतिविधियां
उन गतिविधियों को छोड़कर जो सामाजिक दृष्टि से वांछनीय न हों जैसे; शराब बनानेवाली ब्रिवरीस, दूसरी सब प्रकार की विनिर्माण, सेवा, संसाधन गतिविधियां पात्र होंगी. लेकिन अधिकतम 15 लाख रु. की परियोजना लागतवाली अत्‍यंत अनुषंगी और विकेंद्रीकृत इकाइयों को अधिक रोजगार उत्‍पन्‍न करने के लिहाज से उप इकाइयों और मूल इकाई की तरह की तरह माना जाएगा.

प्रतिभूति
भारतीय रिजर्व बैंक के मार्गनिर्देशों के अनुसार, प्रति उधारकर्ता 25000/- रु. तक के ऋणों के लिए, वित्‍तपोषक बैंक, ऋण में से निर्मित आस्तियों के दृष्टिबंधक को छोड़कर मार्जिन राशि या संपार्श्विक प्रतिभूति/अन्‍य पक्षकार गारंटी पर आग्रह नहीं करेगा.

ब्‍याज दर
हिताधिकारियों/बैंकों के लिए प्रभार्य ब्‍याज दर वही होगी जो, समय-समय पर भारतीय रिजर्व बैंक/नाबार्ड द्वारा विशेष रूप से तय की जाए.

चुकौती अवधि :
योजना के नकदी प्रवाह के अधीन, ऋण की चुकौती अवधि, 6 से 12 महीने तक की ऋण स्‍थगन अवधि के साथ 3 से 10 वर्ष के बीच होगी.

विशेष शर्तें
योजना के मानदंडों के अनुसार (प्र.का. गश्‍ती पत्र सं. 140/94)

विपणन अथवा ग्रामीण महिलाओं के गैर कृषि उत्‍पादों के लिए सहायता(एमएएचआईएमए)

योजना के तहत, ग्रामीण महिलाओं के उत्‍पाद बेचनेवाली पंजीकृत स्‍वैच्छिक एजेंसियों(वीए), गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अन्‍य प्रवर्तक संगठनों को ऋण प्रदान किया जाएगा और साथ ही अनुदान के रूप में सहायता दी जाएगी.

उक्‍त योजना के वैशिष्‍ट्य इस प्रकार हैं:

पात्रता
ग्रामीण महिलाओं के उत्‍पाद बेचनेवाली स्‍वैच्छिक एजेंसियां/ गैर-सरकारी संगठन और विपणन संगठनों की सहकारी सोसाइटियां, संघ, योजना के अधीन शामिल किए जाने के लिए पात्र हैं. संगठनों का, कम से कम पिछले 3 वर्षों से कार्य निष्‍पादन प्रमाणित होना चाहिए और उनको ग्रामीण उत्‍पाद बनाने/बेचने का अनुभव होना चाहिए तथा वित्‍तपोषक बैंकों एवं नाबार्ड द्वारा समय-समय पर निर्धारित मानदंडों की पूर्ति करनी होगी.

पात्र गतिविधियां

  1. बाजार बल की मदद से सौदा शक्ति बढ़ाने में ग्रामीण महिलाओं को संगठित करना.
  2. विपणन और वादा सुविधाओं के लिए समर्थन देना.
  3. समेकित विपणन सेवाएं मुहैया कराना जैसे सर्वेक्षण, खरीद-फरोख्‍त, प्रचार, उत्‍प ादन-सह-बिक्री, शेड, स्‍टाल, काउंटर, रैक आदि बनाना, डिसाईन समर्थन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग/लेबलिंग, वज़न करना और श्रेणी तय करना, परीक्षण करना और अन्‍य उपकरण आदि.

सामान्‍य विपणन गतिविधियां जैसे; सामान्‍य संग्रहण सुविधाएं, फ्रीजर, लेबलिंग, पैकेजिंग आदि.

प्रतिभूति और मार्जिन
समय-समय पर लागू बैंक के मानंदडों के अनुसार.

नाबार्ड पुनर्वित्‍त
बैंक ऋणों के लिए नाबार्ड, 100% पुनर्वित्‍त उपलब्‍ध कराएगा और अधिकतम पुनर्वित्‍त , सिर्फ 10 लाख रु. तक सीमित है.

अनुदान/सहायता की मात्रा
संवर्धनात्‍मक अनुदान के रूप में सहायता की मात्रा, सामान्‍यत:, संबंधित एजेंसी द्वारा शामिल की जानेवाली प्रति महिला महिला उद्यमी, 5000/- रु. तक अथवा 3 वर्ष के अंदर हासिल करने के लिए प्रकल्पित न्‍यूनतम 10 लाख रु. की कुल बिक्री के 25% तक सीमित होगी. अर्थात्; संवर्धनात्‍मक अनुदान सहायता, सामान्‍यत: 2.50 लाख रु. प्रति एजेंसी तक सीमित होगी बशर्ते कि ऐसी एजेंसी, कम से कम 3 वर्षों में इकाई को परिचालन की दृष्टि से सक्षम बनाने की दृष्टि से, कुल 10 लाख रु. की बिक्री करनेवाली कम से कम 50 महिलाओं की पृथक रूप से अथवा समूह में मदद कर सके.

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