प्रतिभूतियों के प्रति ऋण

भारत सरकार राहत बांड के प्रति
विभिन्‍न शृंखला में जारी किए गए भारत सरकार राहत बांड के प्रति अंकित मूल्‍य पर 15% मार्जिन के साथ अग्रिम दिए जा सकते हैं.

अधिकतम अग्रिम राशि 10 लाख रु. तक सीमित है.

सावधि जमाराशियों के प्रति ऋण

  1. बैंक जमाराशियों के प्रति अग्रिम, ओवरड्राफ्ट अथवा ऋणों के रूप में दिए जाते हैं
  2. ऐसे अग्रिम, आम तौर पर, उन जमाकर्ताओं को दिए जाते हैं जिनके नाम जमाराशि रखी गईं हों
  3. बैंक जमाराशियों के प्रति अन्‍य पक्षकार को, निर्धारित मानदंडों का पालन करते हुए जिन प्राधिकारियों को अधिकार दिया गया हो उनसे मंजूरी लेकर अग्रिम दिए जा सकते हैं.
  4. नाबालिग़ों के नाम जमाराशियों पर, सिर्फ नाबालिग जमाकर्ताओं के लाभ की दृष्टि से विचार किया जा सकता है और अभिभावक से इस आशय का वचन पत्र लेना होगा कि अग्रिम राशि का नाबालिग के फ़ायदे के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा.
  5. अधिक अवधि, अग्रिम तारीख से जमाराशि की परिपक्‍वता तारीख तक दी जा सकती है.
  6. अदालत के आदेश के बगैर अदालत द्वारा नियुक्‍त अभिभावक के साथ नाबालिग की जमाराशियों के प्रति अग्रिम नहीं दिया जाएगा.
  7. अन्‍य बैंकों की जमाराशियों के प्रति अग्रिम नहीं दिया जाएगा.
  8. अग्रिमों के संबंध में प्रभार्य ब्‍याज दर, उधारकर्ता की श्रेणी तथा अग्रिम के प्रयोजन पर निर्भर होगा.

एनआरई और एफसीएनआर(बी) जमाराशियों के प्रति अग्रिम

एनआरई और एफसीएनआर(बी) जमाराशियों के प्रति ऋणों के बारे में मार्गनिर्देशों के लिए प्र.का. सामान्‍य परिपत्र सं. 8/2001, सामान्‍य परिपत्र सं. 3/02 और अंतर्राष्‍ट्रीय बैंकिंग प्रभाग, प्रधान कार्यालय तथा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी मार्गनिर्देशों को देखें.

आईवीपी/केवीपी/एनएससी के प्रति अग्रिम

  1. उत्‍पादक प्रयोजनों के लिए आईवीपी/केवीपी के अंकित मूल्‍य पर 25% मार्जिन के साथ बैंक की सामान्‍य ब्‍याज दर पर, ऋण/ओवरड्राफ्ट, जमानत के तौर पर पेश किए गए आईवीपी/केवीपी/एनएससी की परिपक्‍वता अवधि तक, मंजूर किए जा सकते हैं.
  2. शाखाओं को एमओए-खंड-II. मद सं. 27-11-6 में दिए गए मार्गनिर्देशों का पालन करते हुए धारक प्रतिभूतियों की प्रामाणिकता और उधारकर्ता की वास्‍तविकता का सुनिश्‍चय करना होगा.
  3. अंकित मूल्‍य पर निर्धारित मार्जिन, अगले 12 महीनों के अंदर खरीदे गए एनएससी के मामले में 35% और अन्‍य मामलों में 25% है.
  4. अग्रिम तभी दिया जाए जब संबंधित डाक घर ने, संबंधित प्रमाणपत्र पर इस आशय का पृष्‍ठांकन किया हो कि प्रमाणपत्र को बैंक में प्रतिभूति के रूप में हस्‍त ांतरित किया गया है.

शेयरों के प्रति अग्रिम

  1. कंपनी डिबेंचरों और अनुमोदित शेयरों के प्रति अग्रिम, या तो ऋण के रूप में या ओवरड्राफ्ट के रूप में दिया जाए.
  2. शेयरों/डिबेंचरों के प्रति अग्रिम देने पर विचार करते समय, बैंक को, मंजूरी पूर्व मूल्‍यांकन और मंजूरी उपरांत अनुवर्ती कार्यवाही करनी होगी.
  3. शेयरों/डिबेंचरों की प्राथमिक जमानत पर अग्रिम सिर्फ इनको दिया जाए -
  • अलग-अलग व्‍यक्ति.
  • स्‍टॉक और शेयर दलाल.
  • न्‍यास और धार्मिक संस्‍थाएं.
  1. अमूर्त किए गए अनुमोदित शेयरों और डिबेंचरों के प्रति ऋण और अग्रिम - अधिकतम सीमा 20 लाख रु.
  2. मार्जिन - अमूर्त किए गए शेयरों का 40%.
  3. मार्जिन - मान्‍यता प्राप्‍त शेयर बाजार में महीने के अंतिम शुक्रवार को निम्‍नतम कीमत अथवा मासिक औसत कीमत पर, जो भी कम हो, मूर्त/इनफो-टेक शेयरों पर 50%.

बंधक ऋण : आवास

  1. घर बनाने/घर की मरम्मत कराने/घर का नवीकरण कराने/घर बढ़ाने के लिए ऋण/प्‍लॉट/साइट खरीदने के लिए ऋण.
  2. आवास के लिए पूरक ऋण.
  3. आवास ऋण का अधिग्रहण करना.
  4. घर/फ्लैट बनाने के लिए कोई उच्‍चतम सीमा नहीं है(मरम्‍मत कराने के लिए : 10 लाख रु.).
  5. एनएससी/केवीपी/टीडी के अंकित मूल्‍य/एलआईसी पॉलिसी के एस.वी. तक अतिरिक्‍त रकम देने पर विचार किया जाए.
  6. 80% तक ऋण (मार्जिन : 20%).
  7. अधिकतम 30 वर्ष पुराने मकान पर ऋण.
  8. अधिकतम चुकौती - 15 से 20 वर्ष.
  9. मरम्‍मत कराने के लिए - अधिकतम 50 वर्ष पुराने भवन.
  10. 60 महीने के वेतन/आय के समतुल्‍य ऋण राशि.

अचल संपत्ति के प्रति बंधक ऋण

अचल संपत्ति में शामिल है - भवन, भवन से मिलनेवाले लाभ और भूमि में गड़ी हुई चीज़ें. लेकिन खड़े पेड़, उगनेवाली फसलें अथवा घास शामिल नहीं है.

यद्यपि नीचे उल्लिखित श्रेणी के प्रस्‍तावों को निम्‍न प्राथमिकता वाले प्रस्‍ताव की तरह माना जाता रहेगा, फिर भी प्र.का. परिपत्र सं. 5/2002 में निर्दिष्‍ट पात्रता संबंधी मानदंडों और एमओए - खंड - 3 के अध्‍याय 44 में दिए गए मार्गनिर्देशों का पालन करने पर इन श्रेणियों के प्रस्‍ताव स्‍वीकार किए जा सकते हैं.

  1. स्‍थावर संपदा/प्रॉपर्टी डेवेलपर्स/बिल्‍डर्स को ऋण.
  2. सिनेमा थीएटर बनाने के लिए ऋण.
  3. समुदाय/सम्‍मेलन/बैठक/विवाह हॉल बनाने के लिए ऋण.
  4. शैक्षिक संस्‍थाओं को ऋण.
  5. होटल, लॉज, हॉलिडे रेसॉर्ट, निजी क्‍लब बनाने के लिए ऋण.
  6. तंबाकू और प्रसंस्‍करण का व्‍यापार.
  7. कॉफी क्‍यूरिंग और कॉफी बीजों का व्‍यापार करने के लिए अग्रिम.

 अचल संपत्ति के प्रति अग्रिम देते समय, शाखाओं को, निर्दिष्‍ट अंतराल में, बैंक के निर्धारित प्रारूप में, संपत्ति के हर पहलू के बारे में कानूनी राय और मूल्‍यांकन रिपोर्ट प्राप्‍त करनी होगी. संपत्ति का निरीक्षण किया जाए और निर्धारित प्रारूप में निरीक्षण रिपोर्ट रेकॉर्ड में रखा जाए. जमानत के तौर पर अचल संपत्ति को स्‍वीकार करते समय और नकली स्‍वत्‍व विलेख जमा कराने की घटनाओं की रोकथाम करने की दृष्टि से, प्र.का. परिपत्र सं. 270/99 में निर्दिष्‍ट एहतियात बरतनी होंगी.

सोने के आभूषणों और ज़ेवरों के प्रति अग्रिम

 ग्रामीण और अर्ध-नगरीय शाखाओं में और खासकर उन शाखाओं में जहां वाणिज्यिक कारोबार कोई खास गुंजाइश न हो, सोने के आभूषणों और ज़ेवरों(22 कैरेट) के प्रति 575/- रु. प्रति ग्राम की दर से अथवा आंके गए मूल्‍य के 80% तक, जो भी कम हो, ऋण दिया जाए.

रत्‍न ऋण, कृषि प्रयोजन के लिए भी दिए जा सकते हैं परंतु ऋण की मात्रा, आवश्‍यकता आधारित होनी चाहिए और उसका निर्धारण, उगाए गए फ़सलों अथवा प्रस्‍तावित निवेश के आधार पर करना चाहिए.

मशीनों के दृष्टिबंधक के प्रति अग्रिम

अगर मशीनों को जमानत पर पेश करने का प्रस्‍ताव हो तो, नीचे उल्लिखित प्रक्रिया अपनाई जाए:

  1. अगर दृष्टिबंधक रखे जानेवाले संयंत्र और मशीनें, जमीन में गडी हों और वे, जिस भूमि तथा भवन में गड़ी हों वह आवेदक की हो परंतु उसने उसे पहले से ही कहीं बंधक रखा हो तो इन मशीनों को जमानत के तौर पर नहीं लिया जा सकेगा और इसलिए शाखाएं, इन प्रस्‍तावों में कोई रुचि न दिखाएं.
  2. अगर भूमि और भवन, आवेदक से भिन्‍न व्‍यक्ति का हो और आवेदक ने उसे पट्टे पर लिया हो तो, आवेदक के स्‍वामित्‍व का सबूत मिलने पर लगाए गए मशीनों का दृष्टिबंधक स्‍वीकार किया जाए भले ही वे जमीन में गडी हों, बशर्ते कि भूमि के मालिक से कोई दावा न होने का पत्र मिला हो.
  3. अगर दृष्टिबंधक रखी जानेवाली मशीनें, आवेदक के भवन में स्‍थाई तौर पर लगाई हों लेकिन किसी भी तरह से जमीन में न गडी हों तो इन मशीनों की जमानत स्‍वीकार की जा सकती है.
  4. दृष्टिबंधक रखी जानेवाली मशीनें, आम तौर पर नई होनी चाहिए. अगर मशीन पुरानी हो तो प्रतिभूति का मूल्‍य निर्धारित करते समय, क्रय वर्ष, चलने की अवधि और सामान्‍य मूल्‍यह्रास को हिसाब में लिया जाए.
  5. शाखा प्रबंधक को सुनिश्चित करना होगा कि बैंक दृष्टिबंधक रखी जानेवाली मशीनें परियोजना के लिए उपयुक्‍त हैं.
  6. मशीनों को दृष्टिबंधक रखने के बाद, पॉलिसी में बैंक खंड समाविष्‍ट करते हुए उसका आग के जोखिम के प्रति बीमा कराया जाए.
  7. हर एक मशीन पर छोटे से टिन प्‍लेट लगाकर उन पर इस तरह से लिखा जाए '' विजया बैंक ------------------- शाखा में दृष्टिबंधक रखा गया है '' जिससे यह सबूत मिल सके कि संयंत्र और मशीनें, बैंक में दृष्टिबंधक रखी गई हैं.
  8. अगर उधारकर्ता, एक लिमिटेड कंपनी हो तो बैंक के पक्ष में निर्मित प्रभार का कंपनियों के रजिस्‍ट्रार के पास पंजीकरण कराया जाए.
  9. बैंक द्वारा अनुमोदित सक्षम इंजीनियर द्वारा मशीनों का मूल्‍यांकन कराया जाए.
  10. मूल बीजक की संवीक्षा कराई जाए. मशीनों की आगे चलने की गुंजाइश पर विचार करने के बाद मूल्‍यांकन करते समय मशीनों का बाजार मूल्‍य हिसाब में लिया जाए.
  11. जब कभी मशीनों/उपकरणों के प्रति अग्रिम दिया जाए, शाखाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके मूल्‍य पर निर्धारित मार्जिन कर समय बनाए रखा जाता है.
  12. जब मोटर वाहनों के प्रति अग्रिम दिया जाए, ऐसे वाहनों पर बैंक के ग्रहणाधिकार का क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के पास पंजीकरण कराया जाए.
  13. मोटर वाहनों के प्रति अग्रिम और औद्योगिक अग्रिम से संबंधित अध्‍याय में दिए गए विभिन्‍न अनुदेशों का पालन किया जाए.

स्‍थावर संपदा प्रॉपर्टी डेवेलपर्स और बिल्‍डर्स को ऋण

यद्यपि स्‍थावर संपदा प्रॉपर्टी डेवेलपर्स और बिल्‍डर्स के प्रस्‍तावों को निम्‍न प्राथमिकता वाले प्रस्‍ताव की तरह माना जाता रहेगा, फिर भी प्र.का. परिपत्र सं. 5/2002 में निर्दिष्‍ट पात्रता संबंधी मानदंडों और एमओए - खंड - 3 के अध्‍याय 44 में दिए गए मार्गनिर्देशों तथा समय-समय पर जारी नीति संबंधी मार्गनिर्देशों का पालन करने पर इन श्रेणियों के प्रस्‍ताव स्‍वीकार किए जा सकते हैं.

सिनेमा थीएटर बनाने - चल चित्र निर्माण के लिए ऋण

यद्यपि स्‍थावर संपदा प्रॉपर्टी डेवेलपर्स और बिल्‍डर्स के प्रस्‍तावों को और सिनेमा थीएटर बनाने के लिए ऋण प्रस्‍तावों को निम्‍न प्राथमिकता वाले प्रस्‍ताव की तरह माना जाता रहेगा, फिर भी प्र.का. परिपत्र सं. 5/2002 में निर्दिष्‍ट पात्रता संबंधी मानदंडों और एमओए - खंड - 3 के अध्‍याय 44 में दिए गए मार्गनिर्देशों तथा समय-समय पर जारी नीति संबंधी मार्गनिर्देशों का पालन करने पर इन श्रेणियों के प्रस्‍ताव स्‍वीकार किए जा सकते हैं.

बही ऋणों और प्राप्‍त वस्‍तुओं का दृष्टिबंधक

ऐसी सुविधाएं देते समय, अदाकर्ता कंपनी के साथ ठेकों की शर्तों का अध्‍ययन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि ऋण की अवधि आम तौर पर 90 दिन पार नहीं करती है. यद्यपि बही ऋणों के प्रति अग्रिमों का वर्गीकरण अब ज़मानती अग्रिमों रूप में किया जा रहा है (प्र.का. परिपत्र सं. 189/2000), फिर भी प्रत्‍यायोजित अधिकारों का प्रयोग करते समय उच्‍चतम सीमा (कुल सीमाओं के अंदर) का पालन करना होगा. आपूर्ति बिलों के प्रति अग्रिम के संबंध में, उधारकर्ता द्वारा बैंक के पक्ष में निष्‍पादित अपरिवर्तनीय मुख़्तारनामे का उन अदाकर्ताओं के साथ जिनके नाम बिल निकाले गए हों अथवा जिनको आपूर्ति की गई हो, पंजीकरण कराना होगा.

शैक्षिक संस्‍थाओं को ऋण

यद्यपि शैक्षिक संस्‍थाओं को दिए गए ऋणों को निम्‍न प्राथमिकता वाले ऋणों की तरह माना जाता रहेगा, फिर भी प्र.का. परिपत्र सं. 5/2002 में निर्दिष्‍ट पात्रता संबंधी मानदंडों और एमओए - खंड - 3 के अध्‍याय 44 में दिए गए मार्गनिर्देशों तथा समय-समय पर जारी नीति संबंधी मार्गनिर्देशों का पालन करने पर इन श्रेणियों के प्रस्‍ताव स्‍वीकार किए जा सकते हैं.

समुदाय/सम्‍मेलन/ बैठक और विवाह हॉल बनाने के लिए ऋण

यद्यपि समुदाय/सम्‍मेलन/ बैठक और विवाह हॉल बनाने के लिए दिए गए ऋणों को निम्‍न प्राथमिकता वाले ऋणों की तरह माना जाता रहेगा, फिर भी प्र.का. परिपत्र सं. 5/2002 में निर्दिष्‍ट पात्रता संबंधी मानदंडों और एमओए - खंड - 3 के अध्‍याय 44 में दिए गए मार्गनिर्देशों तथा समय-समय पर जारी नीति संबंधी मार्गनिर्देशों का पालन करने पर इन श्रेणियों के प्रस्‍ताव स्‍वीकार किए जा सकते हैं.

संपदा खरीदने के लिए ऋण और अग्रिम

यद्यपि संपदा खरीदने संबंधी प्रस्‍तावों को निम्‍न प्राथमिकता वाले प्रस्‍ताव की तरह माना जाता रहेगा, फिर भी प्र.का. परिपत्र सं. 5/2002 में निर्दिष्‍ट पात्रता संबंधी मानदंडों और एमओए - खंड - 3 के अध्‍याय 44 में दिए गए मार्गनिर्देशों तथा समय-समय पर जारी नीति संबंधी मार्गनिर्देशों का पालन करने पर इन श्रेणियों के प्रस्‍ताव स्‍वीकार किए जा सकते हैं.

वाहनों के दृष्टिबंधक के प्रति ऋण

पात्रता :
वेतन-भोगी, पेशेवर और स्‍व-नियोजित व्‍यक्ति, व्‍यवसायी, कृषक - 21 और 55 वर्ष के बीच की उम्र के व्‍यक्ति.
प्रयोजन :
निजी उपयोग अथवा पेशेवर अथवा व्‍यावसायिक उपयोग के लिए किसी भी बनावट का नए टू व्‍हीलर/मोटर कार खरीदने के लिए.
पुराना/उपयोग किया गया टू व्हीलर/अधिकतम 5 वर्ष पुरानी मोटर कार खरीदने के लिए.
ऋण की मात्रा :
नए ऋणों के मामले में, सहायक उपकरणों और पंजीकरण खर्च सहित वाहन के बीजक मूल्‍य की लागत का 80%.
ब्‍याज दर :
निश्चित दर (ऋण विभाग द्वारा समय-समय पर सूचित ब्‍याज दर)
संसाधन शुल्‍क/निरीक्षण प्रभार/फोलियो प्रभार माफ किया गया है.
प्रतिभूति :
बैंक ऋण में से खरीदे गए वाहनों का दृष्टिबंधक
गारंटीकर्ता :
बैंक को स्‍वीकार्य एक गारंटीकर्ता.

चुकौती :
60 समान मासिक क़िस्तों में चुकौती.

सूचना प्रौद्योगिकी के लिए कार्यकारी पूंजीगत वित्‍त

सॉफ्टवेयर उद्योग के लिए मंजूर किए गए 1 करोड़ रु. तक के अग्रिमों को प्राथमिकता क्षेत्र अग्रिम के तहत लिया जा सकता है.

सॉफ्टवेयर कंपनियों के कार्यकारी पूंजीगत वित्‍त का निर्धारण करने के लिए पीबीएस फार्म - अनुदेश पुस्तिका खंड III का परिशिष्‍ट - xi - अनुबंध - क.
सूचना प्रौद्योगिकी के लिए कार्यकारी पूंजीगत वित्‍त के बारे में प्र.का. परिपत्र सं. 277/98 देखें.

वस्‍तुओं अथवा वस्‍तुओं के स्‍वत्‍व प्रलेखों को गिरवी रखने पर

व्‍यापारियों को उनकी व्‍यापारिक गतिविधियों के लिए, विनिर्माता और उत्‍पादकों को उनकी कच्‍चे माल आदि की ज़रूरतों के लिए और साथ ही उनको अपने उत्‍पाद बेहतर कीमत पर बिकवाना सुसाध्‍य बनाने की दृष्टि से वस्‍तुओं के प्रति अग्रिम दिए जाते हैं. इसका मकसद है, उधारकर्ता को अपनी वस्‍तुएं थोड़े से समय तक रखकर बैंक के पक्ष में गिरवी निर्मित करना. यह एक ऐसा खाता है, जहां सीमा/आहरण शक्ति के अंदर सीमा की अवधि के दौरान निर्दिष्‍ट समय तक और आम तौर पर एक वर्ष तक ऋण दिया जाता है और जितनी बार चाहे उतनी बार वस्‍तुओं को निर्मोचित किया जाता है. उधारकर्ता, चेक जारी कर अथवा नकद और वसूली के लिए अन्‍य प्रपत्र जमा कर इस सीमा का उपयोग नहीं कर सकेगा.

उधारकर्ता की साख पात्रता और ज़रूरतों के आधार पर वस्‍तुओं के गिरवी अथवा दृष्टिबंधक के रूप में वस्‍तुओं के प्रति अग्रिम दिया जाता है और इस दौरान यह ध्‍यान में रखा जाता है कि जहां कहीं संभव और व्‍यवहार्य हो, दृष्टिबंधक की तुलना में हमेशा गिरवी के रूप में जमानत को वरीयता देना बेहतर होगा.

उन वस्‍तुओं के प्रति जो उधारकर्ता की एकमात्र संपत्ति न हो अथवा जहां उनको बेचने के उधारकर्ता के अधिकार पर पाबंदी लगा दी गई हो, अग्रिम न दिए जाएं.

वस्‍तुओं की गिरवी का मतलब है, ऋण का भुगतान करने अथवा वचन निभाने के इरादे से प्रतिभूति के तौर पर वस्‍तुओं का उप निधान(बेलमेंट). इसमें वस्‍तुओं के कब्‍जे का स्‍वेच्‍छा से हस्‍त ांतरण होता है. सुपुर्दगी या तो भौतिक रूप में या रचनात्‍मक रूप में हो सकती है. गिरवी तब निर्मित होगी जब वस्‍तुओं का वास्‍तविक कब्‍जा, जमानत के तौर पर बैंक में हस्‍तांतरित हो या किसी ऐसे दूसरे तरीके से, जिससे संपुर्दगी प्रभावित हो, जैसे पृष्‍ठांकन वस्‍तुओं के स्‍वत्‍व प्रलेखों की सुपुर्दगी के मामले में होता है.

एमओए - खंड - II में क्रम सं. 31.7.1 से 31.18 में दिए गए मार्गनिर्देशों/अनुदेशों का पालन किया जाए.

अन्‍य चल आस्तियों का दृष्टिबंधक

  1. दृष्टिबंधक आधार पर सुविधाएं देते समय, लिमिटेड कंपनियों को वरीयता दी जाती है क्‍योंकि प्रतिभूतियों के प्रभार का पंजीकरण, कंपनियों के रजिस्‍ट्रार के कराया जा सकता है. स्‍टॉक रखने की अच्‍छी पद्धति अपनानेवाले उधारकर्ताओं को छूट दी जाती है.
  2. जब नकदी ऋण के आधार पर सुविधाएं दी जाएं जब यह जरूरी है कि उधारकर्ता, अपने कारोबार का सारा लेन-देन नकदी ऋण खाते से करे.
  3. मौसमी पण्‍य के प्रति दिए गए अग्रिम, मौसम के अंत तक चुकाए जाने चाहिए.
  4. अग्रिम संबंधी पुस्तिका में वस्‍तुओं के प्रति अग्रिम अध्‍याय में दिए गए दूसरे अनुदेशों का पालन किया जाए.
  5. वस्‍तुएं आसानी से और तेजी से बेचने लायक हों.
  6. आसानी से नष्‍ट होनेवाली और जलनेवाली वस्‍तुएं स्‍वीकार न की जाएं.
  7. अग्रिम, उन वस्‍तुओं की जमानत पर दिए जाएं जिनका उधारकर्ता आम तौर पर व्‍यापार करे.
  8. मौसमी वस्‍तुओं को, प्र.का. की मंजूरी के बगैर एक वर्ष से ज्‍यादा समय तक न रखा जाए.
  9. उन वस्‍तुओं को, जिनकी गुणवत्‍ता और कीमत का निर्धारण आसानी न किया जा सके, स्‍व ीकार न किया जाए.
  10. विनिर्मित वस्‍तुओं के मामले में, शाखा प्रबंधक को विनिर्माताओं के बीजकों का सत्‍यापन करना होगा
  11. बीजकों का परीक्षण करते समय, यह देखा जाए कि उधारकर्ता ने वस्‍तुएं परेषण आधार पर न रखी हैं अथवा आपूर्तिकर्ता का या तो वस्‍तुओं पर अथवा उनकी बिक्री प्राप्तियों पर प्रभार है
  12. वस्‍तुओं का व्‍यापार करने, संग्रहण करने, परिवहन करने अथवा संभालने के लिए, जहां कहीं जरूरी हो, संबंधित प्राधिकारियों से लाइसेंस अथवा परमिट लिए जाएं.

वस्‍तुओं के प्रेषण के सबूत के तौर पर प्रलेखी बिल के प्रति अग्रिम

  1. बिलों की खरीदारी/भुनाई के लिए विचार की गई सीमाएं, सामान्‍य ऋण निर्धारण/मूल्‍य ांकन के आधार पर उधारकर्ताओं की कारोबार ज़रूरतों के अनुरूप होनी चाहिए
  2. मुदृती बिलों के मामले में, जब तक अन्‍यथा निर्दिष्‍ट तौर पर अनुमति न दी गई हो, मुद्दत, सामान्‍यत: 90 दिनों से अधिक न हो.
  3. जहां तक हो सके, उन अदाकर्ताओं पर, जिन्‍होंने उन पर पहले आहरित बिल नकारे थे, बिलों की खरीदारी/भुनाई न की जाए.
  4. तकनीकी कारण को छोड़कर किसी वजह से अदत्‍त लौटाए गए बिलों को दोबारा खरीदने की इजाजत नहीं है.
  5. बही ऋणों के प्रति अग्रिम के साथ बिल खरीदने/भुनाने की सुविधा तब तक न दी जाए जब तक बिल खरीदने/भुनाने की सुविधा के लिए अलग-अलग अदाकर्ताओं को ठीक तरह से और सुस्‍पष्‍ट रूप से पहचाना न गया हो.
  6. मांग प्रलेखी बिलों के मामले में, वस्‍तुओं के स्‍वत्‍व प्रलेख हाल की तारीख के होने चाहिए और उन अनुमोदित वस्तुओं के परेषण से संबंधित होने चाहिए जिसमें ग्राहक व्‍यापार करता हो और उन स्‍थानों पर आहरित हो जहां ग्राहक, आम तौर पर वस्‍तुएं भेजता हो.
  7. बिलों की खरीदारी/भुनाई की सुविधा सिर्फ उन पक्षकारों को दी जाए जिनको उस प्रयोजन के लिए सीमाएं मंजूर की गई हों..
  8. उधारकर्ता, बिल बनाकर न कि किसी दूसरे तरीके से, बिल में उल्लिखित पण्‍य/वस्‍तुओं का व्‍यापार करता हो.

 

अदाकर्ता पर आहरित और अदाकर्ता द्वारा स्‍वीकृत बिलों के प्रति अग्रिम

 मुद्दती बिलों के मामले में, जब तक अन्‍यथा निर्दिष्‍ट तौर पर अनुमति न दी गई हो, मुद्दत, सामान्‍यत: 90 दिनों से अधिक न हो, जैसे विदेशी प्रलेखी मुद्दती बिलों के मामले में जहां मुद्दत, ज्‍यादा से ज्‍यादा 180 दिनों तक बढाई जाती है.

बिलों की खरीदारी/भुनाई, समय-समय पर जारी किए गए प्रधान कार्यालय के अनुदेशों के अनुसार ही की जाए.

साख पत्र के तहत आहरित बिलों के प्रति अग्रिम

साख पत्र के तहत आहरित देशी डी/ए/डी/पी बिलों के प्रति अग्रिम.
साख पत्र के तहत और वाणिज्यिक बैंकों द्वारा सह-स्‍वीकृत बिल.
जोखिम सीमा:

लेन-देन का प्रकार बैंक प्रति बैंक जोखिम सीमा
दूसरे बैंकों के देशी साख पत्र के तहत हमारी शाखाओं द्वारा बिलों का परक्रामण, खरीदारी, भुनाई. राष्‍ट्रीयकृत बैंक /सरकारी क्षेत्र के बैंक. 5 करोड़ रु.

जोखिम सीमा से अधिक लेन-देन का मामला, ऋण विभाग, प्र.का. के साथ उठाया जाए.

  1. शाखाएं, दूसरे बैंकों के प्रतिसंहरणीय साख पत्र के तहत आहरित बिलों को न खरीदें न ही भुनाएं.
  2. सहकारी बैंकों द्वारा जारी साख पत्र के तहत आहरित बिलों को खरीदा/भुनाया न जाए. साख पत्र जारी करनेवाले बैंक से उनके नियंत्रक कार्यालय के जरिए लिखित पुष्‍टीकरण प्राप्‍त किया जाए.

वाणिज्यिक बैंकों द्वारा सह-स्‍वीकृत बिलों के प्रति अग्रिम

प्रथम दर्जे की कंपनियों, फर्म, सरकारी प्रतिष्‍ठानों के अन्‍य पक्षकारों के सिर्फ उन चेकों, बैंक मांग ड्राफ्टों को, जो प्रमाणिक व्‍यापारी लेन-देन से जुडे हों, खरीदे जाएं. जब तक अन्‍यथा निर्दिष्‍ट न किया गया हो स्‍थानीय चेक न खरीदे जाएं.

  1. खुद उधारकर्ताओं अथवा उनकी शाखाओं/निकट रिश्‍तेदारों/सहयोगी फर्मों द्वारा आहरित निभाव न खरीदे जाएं.
  2. उत्‍तर दिनांकित चेक न खरीदे जाएं और '' अपरक्राम्‍य '' रेखांकित चेक, सिर्फ आदाता ग्राहक के लिए खरीदे जाएं.
  3. तकनीकी कारणों को छोड़कर किसी दूसरी वजह से अदत्‍त लौटाए गए चेकों को दोबारा खरीदने की इजाजत नहीं है.

15000 रु की सीमा तक बाहरी चेकों की प्राप्तियां तत्‍क्षण जमा करना

संतोषजनक ढंग से चलाते रहे खातों/ग्राहकों के मामले में वसूली के लिए पेश किए गए 15,000/- रु. तक के बाहरी/स्‍थानीय चेकों की प्राप्तियों को तत्‍क्षण जमा किया जा सकता है.

प्रदर्शन