विभेदक ब्‍याज दर योजना

उद्देश्‍य

इस योजना के तहत, उन लोगों को जो उत्‍पादक गतिविधि चलाना चाहते हैं आवश्‍यकता आधारित सहायता दी जाएगी और यह योजना उन लोगों के लिए अनुकूल है जिनकी आय बहुत कम है. यह योजना, इनके लिए बनाई गई है:

  1. कृषि का कामकाज करनेवाले और/अथवा संबंधित गतिविधियां चलानेवाले अ.जा/अ.ज.जा. के लोग, आदिवासी.
  2. वन उत्‍पाद, चारा जुटाकर बाजार में बेचनेवाले व्‍यक्ति.
  3. छोटे पैमाने पर ग्राम और कुटीर उद्योग से जुडे लोग.
  4. उच्‍चतर अध्‍ययन जारी करने इच्‍छुक गरीब छात्र.
  5. उत्‍पादक गतिविधियों के लिए शारीरिक दृष्टि से विकलांग व्‍यक्तियों की संस्‍थ ा.
  6. अनाथालय, महिला गृह, जहां बेचने लायक वस्‍तुएं बनाई जाती हैं.
  7. अ.जा/अ.ज.जा. के कल्‍याणार्थ काम करनेवाले राज्‍य स्‍तरीय निगम.
  8. खासकर भारत सरकार द्वारा पहचाने गए इलाकों की जन-जातीय आबादी के लिए बनाई गईं सहकारी सोसाइटियां, बडे आकार की बहु-उद्देशीय सोसाइटियां.

पात्रता

 ऋण, उस व्‍यक्ति को दिए जाते हें:

  1. जिसकी सभी स्रोतों से पारिवारिक आय, महा-नगरीय/नगरीय/अर्ध-नगरीय इलाकों में 7,200/- रु. प्र.व. अथवा ग्रामीण इलाकों में 6,400/- रु. प्र.व. से अधिक न हो.
  2. जिसका जोत क्षेत्र, 1.25 एकड़ की सिंचित भूमि अथवा 2.5 एकड़ की शुष्‍क भूमि से अधिक न हो. जोत क्षेत्र संबंधी मानदंड, अ.जा/अ.ज.जा. के उधारकर्ताओं के लिए लागू नहीं होता है.

प्रतिभूति

सिर्फ ऋण में से निर्मित आस्तियों का दृष्टिबंधक.

ऋण राशि

6,500/- रु. तक संमिश्र ऋण. शैक्षिक प्रयोजना के लिए दिए गए डीआरआई ऋणों के लिए कोई उच्‍चतर सीमा नहीं है.

ब्‍याज दर

4;00% प्र.व.

मार्जिन

उधारकर्ता को मार्जिन राशि देने की जरूरत नहीं है.

चुकौती

सावधि ऋण के लिए चुकौती अवधि 5 वर्ष तक है.

योजना के तहत लक्ष्‍य

योजना के तहत पिछले वर्ष के निवल अग्रिमों का 1% देना होगा.

कुल डीआरआई अग्रिम में से, 40%, अ.जा/अ.ज.जा. के हिताधिकारयों को और डीआरआई अग्रिमों का कम से कम 66.66%, ग्रामीण और अर्ध-नगरीय शाखाओं के जरिए देना होगा.

डीआरआई हिताधिकारी

डीआरआई अग्रिम:

डीआरआई हिताधिकारी वे होते हैं जिनको 4% प्र.व. की दर से ऋण और अग्रिम दिए जाते हैं और जो कुटीर और ग्राम उद्योग से जुडे रहते हैं जैसे; बास्‍केट बनानेवाले, झाडू बनानेवाले, लोहार, कार्पेंटर, मोची, साइकिल मरम्‍मत करनेवाले, जलाऊ लकडी बेचनेवाले, मछली बेचनेवाले, हस्‍तशिल्‍प, फेरीवाले, चमड़े का काम करनेवाले किसान, चारपाई बनानेवाले, पान की दूकान और तंबाकू व्‍यापारी, पापड़ बनानेवाले, कुम्‍हार, सड़क के किनारे चाय और खाने की चीज़ें की दूकान, रस्‍सी बनानेवाले, खाने की चीज़ें बेचनेवाले, दर्ज़ी, टेरी-बनानेवाले, सब्‍जी बेचनेवाले, घर पर आकर काम करनेवाले अथवा सामान और दैनिक ज़रूरतों की चीज़ें देकर जानेवाले, खुद का हाथ का रिक्शा अथवा साइकिल रिक्शा चलानेवाले आदि और डेरी, मुर्ग़ी पालन, बकरी पालन, मधुमक्‍खी पालन आदि जैसी; कृषि और/अथवा उससे संबद्ध गतिविधियां, मामूली तौर पर चलानेवाले अ.जा/अ.ज.जा. के लोग. आगे, ग्राम और कुटीर उद्योग के क्षेत्र से जुडे तथा कीटनाशक छिडकाने का काम करनेवाले शारीरिक दृष्टि से विकलांग तथा उच्‍चतर शिक्षा जारी रखना चाहनेवाले ऐसे होनहार और जरूरतमंद छात्र, जिनको सरकार अथवा शैक्षिक प्राधिकरणों से छात्रवृत्ति/भरण-पोषण अनुदान नहीं मिलता है. अर्जक रोजगार करनेवाले शारीरिक दृष्टि से विकलांग व्‍यक्तियों को योजना के तहत वित्‍तीय सहायता दी जा सकती है.

ऊपर उल्लिखित अलग-अलग हिताधिकारियों के अतिरिक्‍त, नीचे उल्लिखित संस्‍थागत हिताधिकारियों को भी डीआरआई योजना के तहत शामिल किया जाता है:

  1. अनाथालय और महिला गृह
  2. शारीरिक/मानसिक दृष्टि से विकलांग व्‍यक्तियों के लिए संस्‍थाएं
  3. सहकारी सोसाइटियां, जहां ऋण, उन्‍हीं नियमों और शर्तों पर दिया जाता है जो अ.जा/अ.ज.जा. के कल्‍य ाणार्थ राज्‍य सरकार के स्‍वामित्‍ववाले निगमों के लिए लागू होते है.
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